आँखों के आसपास की दुनिया: धूप, धूल और डॉक्टर की कुर्सी
अभ्यास केवल आधी बात है। रोशनी, मौसम, भोजन और नींद भी तय करते हैं कि दिन आँखों के लिए कैसा रहा। और कुछ संकेत ऐसे हैं जिन पर अभ्यास नहीं, डॉक्टर चाहिए।
हर मौसम की अपनी रोशनी
भारत में एक ही साल में तेज़ धूप, नम बादल और धुंध भरी सर्दी आती है। हर मौसम में आँखों को अलग चीज़ें परेशान कर सकती हैं। तालिका सामान्य अनुभवों पर है; आपके शहर में स्थिति अलग हो सकती है।
एलर्जी, बार-बार खुजली या लालिमा हो तो मौसम को दोष देने से पहले डॉक्टर से बात करें।
गर्मी
रोशनी और हवातेज़ धूप, सड़क और दीवारों से चमक, गर्म-सूखी हवा और लू।
छोटी आदतबाहर धूप का चश्मा या टोपी, भरपूर पानी, दोपहर में कूलर-एसी की हवा चेहरे से हटाकर।
मानसून
रोशनी और हवाबादलों से धीमी रोशनी, नमी, कमरों में दिन में भी अँधेरा।
छोटी आदतदिन में भी पढ़ने की जगह पर पूरी रोशनी, गीले हाथों से आँखें न छूना, अपना तौलिया अलग।
शरद और त्योहार
रोशनी और हवासाफ़ आसमान, पर पटाखों और दीयों के धुएँ वाली कुछ रातें।
छोटी आदतपटाखों से दूरी और बच्चों पर नज़र; आँख में चिंगारी या चोट लगे तो रगड़ें नहीं, सीधे अस्पताल।
सर्दी
रोशनी और हवाछोटे दिन, धुंध और कई शहरों में धूल-धुआँ; हीटर के पास सूखी हवा।
छोटी आदतदोपहर की धूप में कुछ मिनट बाहर, हीटर से कुछ दूरी, जलन हो तो साफ़ पानी से चेहरा धोना।
पूरे साल
रोशनी और हवाशाम को ट्यूबलाइट और स्क्रीन की मिली-जुली रोशनी।
छोटी आदतरात में स्क्रीन के साथ कमरे की हल्की रोशनी भी जलती रहे, पूरे अँधेरे में फ़ोन नहीं।
आँखें भी उसी थाली से पोषण लेती हैं
कोई एक भोजन "नज़र तेज़" नहीं करता। फिर भी विविध, संतुलित भोजन शरीर के सामान्य कामकाज का हिस्सा है, और आँखें उसी शरीर का हिस्सा हैं।
- हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ
- पालक, मेथी, सरसों, चौलाई: इनमें ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो शरीर के सामान्य कामकाज से जुड़े हैं।
- पीले-नारंगी रंग
- गाजर, कद्दू, पपीता, आम: मौसम के हिसाब से थाली में रंग बदलते रहें।
- दालें, मेवे, बीज
- रोज़ के भोजन में प्रोटीन और विविधता का एक आसान तरीका।
- पानी
- गर्मी और एसी वाले कमरों में प्यास से पहले भी पानी पीते रहें।
- नींद
- पूरी नींद आँखों के आराम का सबसे सीधा हिस्सा है। सोने से पहले स्क्रीन कुछ देर पहले बंद करें।
विटामिन या सप्लीमेंट अपने मन से न लें। डायबिटीज़ या किसी और बीमारी में भोजन के बारे में डॉक्टर या पोषण-विशेषज्ञ की सलाह मानें।
कब नेत्र-विशेषज्ञ के पास जाएँ
यह सूची निदान नहीं है। इसका मकसद केवल यह बताना है कि कुछ संकेतों पर इंतज़ार या घरेलू उपाय ठीक नहीं।
आपात स्थिति 112
तुरंत, उसी दिन
- एक या दोनों आँखों से अचानक दिखना बंद होना या तेज़ धुंधलापन
- रोशनी की चमक, अचानक बहुत से तैरते धब्बे, या नज़र पर पर्दा-सा
- आँख में चोट, रसायन या कोई चीज़ चली जाना
- आँख में तेज़ दर्द, साथ में सिरदर्द या उल्टी
- अचानक दोहरा दिखना
जल्दी समय लेकर
- लालिमा, सूजन या पानी आना जो कुछ दिन में न जाए
- पढ़ने या दूर देखने में धीरे-धीरे बढ़ती दिक्कत
- बार-बार सिरदर्द, खासकर पढ़ाई या स्क्रीन के बाद
- रात में देखने में परेशानी या रोशनी के चारों ओर घेरे
- डायबिटीज़ या ब्लड प्रेशर हो और जाँच लंबे समय से न हुई हो
जाँच के दिन साथ ले जाने लायक सवाल
डॉक्टर के सामने अक्सर ज़रूरी बातें याद नहीं आतीं। यह पर्ची उसी के लिए है। अपनी भाषा में, अपने शब्दों में पूछिए।
नेत्र-जाँच: मेरे सवाल
- मुझे कितने समय बाद दोबारा जाँच करानी चाहिए?
- मेरे काम (स्क्रीन, पढ़ाई, ड्राइविंग) के हिसाब से कोई सावधानी?
- क्या चश्मा हर समय पहनना है या केवल पढ़ते समय?
- सूखापन या जलन के लिए क्या करूँ, क्या नहीं?
- क्या ब्लड शुगर या ब्लड प्रेशर के कारण अलग जाँच चाहिए?
- किन संकेतों पर मुझे तुरंत लौटकर आना चाहिए?